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    ईरानी प्रदर्शनकारी बोले- ट्रम्प ने हमें धोखा दिया:सबसे ज्यादा जरूरत के वक्त समर्थन नहीं किया; हिंसा में अब तक 5000 लोगों की मौत

    1 day ago

    ईरान में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से उम्मीद थी कि वे उनके लिए मददगार साबित होंगे। लेकिन अब ट्रम्प के रुख में बदलाव आ गया है, इससे वह अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि ट्रम्प ने जो कहा और बाद में जो किया, उनके बीच बहुत बड़ा फर्क था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश छोड़ गए एक ईरानी ने कहा- ट्रम्प ने हमें धोखा दिया और बेवकूफ बनाया। जब ट्रम्प ने कहा कि एक ईरानी अधिकारी ने उन्हें और हत्याएं न करने का भरोसा दिलाया है, तो यह सुनकर हम हैरान रह गए। एक ईरानी ने कहा, ट्रम्प के बयानों की वजह से लोगों को उम्मीद जागी थी और उन्होंने जान जोखिम में डालकर प्रदर्शन किया, लेकिन जब सबसे ज्यादा जरूरत थी तब अमेरिका का समर्थन खत्म हो गया। ईरान में 28 दिसंबर से जारी हिंसक प्रदर्शन में अब तक 5,000 लोगों की मौत हो गई है। इनमें करीब 500 सुरक्षाकर्मी शामिल है। एक ईरानी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर रॉयटर्स को यह जानकारी दी है। उन्होंने यह भी बताया कि सबसे ज्यादा हिंसक झड़पें उत्तर-पश्चिम ईरान के कुर्द इलाकों में हुईं, जहां हालात सबसे ज्यादा खराब थे। ईरान में लाशों के ढेर से खोजा बेटी का शव ईरान में फैशन की पढ़ाई कर रही 23 साल की एक कॉलेज की छात्रा को ईरानी सुरक्षा बलों ने 8 जनवरी को गोली मार दी थी। घटना की जानकारी अब सामने आई है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक छात्रा की मां को लाशों के ढेर के बीच अपनी बेटी की बॉडी ढूंढनी पड़ी। रिपोर्ट के मुताबिक छात्रा रूबिना अमिनियन को ईरानी सुरक्षाबलों की गोली सीधे सिर के पीछे लगी, जिससे उसकी मौत हो गई। रूबिना की मौत के एक सप्ताह बाद भी परिवार ने रीति रिवाज से उसका अंतिम संस्कार नहीं किया है। सुरक्षा बलों से बचने के लिए उसके शव को चोरी से सड़क के किनारे गड्ढे में ही दफना दिया। वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार ये माना कि पिछले 28 दिसंबर से जारी प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोग मारे गए। उन्होंने इन मौतों के लिए ट्रम्प को जिम्मेदार ठहराया। खामेनई ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हाथ खून से रंगे हैं। ट्रम्प ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ईरान सरकार अब चंद दिनों की मेहमान है। वहां नए नेतृत्व की तलाश करने का समय आ गया है। छात्रा की दोस्त ने परिवार को मौत की सूचना दी घटना के समय रूबिना की मां करमनशाह शहर में थीं, जो तेहरान से लगभग 460 किलोमीटर दूर है। रूबिना की मां को उसके दोस्तों ने फोन कर बताया कि उन्हें गोली लग गई है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, वे सब 8 जनवरी को कॉलेज से घर लौट रहे थे, तभी प्रदर्शन दिखाई दिया और वे उसमें शामिल हो गए। ईरानी एजेंट राइफल और शॉटगन का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर रहे थे। इस दौरान सुरक्षा बलों की गोली रूबिना के सिर के पीछे लगी। जानकारी मिलते ही रूबिना की मां अमीना नोरेई तुरंत तेहरान रवाना हुईं। वहां उन्होंने बेटी की बॉडी ढूंढी। रूबिना राजनीतिक या सक्रिय गतिविधियों में शामिल नहीं थीं। परिवार ने अधिकारियों के डर से शव को चुराया जब नोरेई को अपनी बेटी मिली, तो परिवार शव के साथ जल्दी से जल्दी शहर छोड़ कर भाग निकला। उन्हें डर था कि अधिकारी उनका रास्ता रोक देंगे और शव को जाने देने के लिए पैसे की मांग करेंगे, यह जानकारी अमीनियन के चाचा मिनोई ने दी। मिनोई ने कहा कि हमने असल में शव को चुराया था, हमारे पास दूसरा रास्ता नहीं था। न्यूयॉर्क स्थित सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स एक बयान में कहा कि उन्हें प्रदर्शनकारियों के शवों को लौटाने के बदले परिवारों से पैसे मांगने की कई सूचनाएं मिली हैं। दूसरे परिवारों ने केंद्र को बताया कि शवों को वापस लेने के लिए उन्हें जबरन ऐसे कागजात पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था जिसमें झूठे तौर पर यह घोषित किया गया था कि उनके मृत रिश्तेदार सुरक्षा बलों के सदस्य थे। रूबिना के शव को मजबूरन सड़क के किनारे गड्ढे में दफनाया मिनोई ने बताया कि वापस आते समय सात घंटे की यात्रा के दौरान नोरेई और उनकी सबसे बड़ी बेटी कार की पिछली सीट पर रूबिना के शव को पकड़े बैठी रहीं, उनके कपड़े खून से भीग गए थे। नोरेई ने बताया कि जब वे घर पहुंचीं तो सुरक्षा बलों ने उनके घर को घेर लिया था। नोरेई के परिवार के पास एक ही विकल्प बचा था। वे शहर से बाहर निकल गए और सड़क के किनारे एक गड्ढा खोदा और उन्होंने शव को दफना दिया। व्हाइट हाउस बोला- ट्रम्प के दबाव में 800 लोगों की फांसी रुकी ट्रम्प ने इससे पहले कहा था कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों को फांसी दिया उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। अमेरिका बहुत कड़ी कार्रवाई करेगा, जिसमें सैन्य विकल्प भी शामिल हो सकता है। 15 जनवरी को ट्रम्प ने बताया कि हत्याएं अब कम हो रही हैं। व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की कि ट्रम्प के दबाव के बाद ईरान ने 800 लोगों की फांसी की योजना रोक दी है। संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव मार्था पोबी ने परिषद को बताया कि ये प्रदर्शन तेजी से फैले। इसमें काफी जान-माल का नुकसान हुआ है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 3,428 प्रदर्शनकारियों को मार डाला गया, जबकि 18,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं कर सका है। ईरान का जवाब: टकराव नहीं चाहते, लेकिन हमला हुआ तो कार्रवाई करेंगे गुरुवार को सुरक्षा परिषद की बैठक में ईरान ने अमेरिकी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के उप राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने कहा कि अमेरिका गलत जानकारी फैला रहा है और जानबूझकर अशांति को हिंसा की ओर मोड़ रहा है। दर्जी ने सुरक्षा परिषद से कहा कि ईरान न तो तनाव बढ़ाना चाहता है और न ही टकराव चाहता है। दर्जी ने चेतावनी दी कि ‘किसी भी तरह की कार्रवाई का निर्णायक और कानूनी जवाब दिया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि यह धमकी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दिया गया बयान है। ईरानी राजदूत ने आरोप लगाया कि अमेरिका मानवाधिकारों की आड़ में शासन बदलने और हमला करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने अमेरिका में हुए मानवाधिकार उल्लंघनों का भी जिक्र किया, जिसमें मिनेसोटा राज्य में एक इमिग्रेशन अधिकारी ने रेनी गुड की हत्या को गोली मार दी थी। अमेरिका ने ईरानी नेतृत्व पर नए प्रतिबंध लगाए ट्रम्प प्रशासन ने 18 ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ नए प्रतिबंधों लगाए हैं। इनमें ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी और कई अन्य अधिकारी शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने प्रदर्शनों पर क्रूर कार्रवाई की योजना बनाई। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, 'राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और उन्होंने वित्त मंत्रालय को प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।' ईरान पहले से ही कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था और ज्यादा कमजोर हुई है। इसी आर्थिक संकट को मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों की बड़ी वजह माना जा रहा है। ईरान में हुए प्रदर्शन का कारण जानिए... ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुई हिंसा कई कारणों से भड़की है। ये प्रदर्शन अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माने जा रहे हैं। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें... ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका:नेतन्याहू ने किस मजबूरी में ट्रम्प को रोका; क्या बरकरार रहेगी खामेनेई की इस्लामिक सत्ता 15 जनवरी को लगने लगा कि ट्रम्प अब कुछ ही घंटे में ईरान पर हमले का आदेश दे सकते हैं। नेतन्याहू का विमान इजराइली एयर स्पेस से बाहर कहीं 'सेफ जगह' पर चला गया। कतर के अमेरिकी एयरबेस से सैनिक हटाए जाने लगे। पेंटागन के आसपास पिज्जा के ऑर्डर्स बढ़ गए। ऐसा तभी होता है, जब अमेरिका कोई बड़ा एक्शन लेने वाला होता है। फिर अचानक ईरान को लेकर ट्रम्प के तेवर नरम पड़ गए। पूरी खबर पढ़ें...
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