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    दिव्या मदेरणा बोलीं- बाजरा बनना चाहूंगी:मंत्रीजी के सामने ट्रांसफर में भ्रष्टाचार की खोल दी पोल; ठेकेदार-JEN फंसे 'गड्‌ढे में'

    2 days ago

    नमस्कार, ओसियां (जोधपुर) से कांग्रेस की पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने एक फूड शो में कहा- मैं बाजरा बनना चाहूंगी। सीकर में एक कार्यकर्ता ने ट्रांसफर को लेकर मंत्रीजी के सामने ही पोल खोल दी। जोधपुर के गड्‌ढे में युवक गिरा तो ठेकेदार-JEN पर एक्शन हो गया और नागौर खनिज निगम के मीटर पर सवाल उठ गए। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. दिव्या मदेरणा बोलीं- बाजरा बनना चाहूंगी दिव्या मदेरणा तेज-तर्रार और वाकपटु नेता हैं। कांग्रेस के टिकट पर ओसियां से विधायक रह चुकी हैं। गिने-चुने नेता हैं, जिनकी साख सेंट्रल मीडिया तक है। उन्होंने एक मशहूर फूड शो के कुछ हिस्से अपने सोशल मीडिया पर शेयर किए। दिलचस्प संवाद है। होस्ट का सवाल- राजनीति अगर थाली हो तो आप क्या बनना पसंद करेंगी? मैडम ने जवाब दिया- चूरमा नहीं बनना चाहूंगी, जिसे कोई भी गूंथ कर खा जाए। न ही मिर्च जैसी तीखी बनूंगी। जो लोग मुझे आशीर्वाद दे रहे हैं उनके लिए मैं बाजरा बनना चाहूंगी। बाजरा घर-घर में होता है। हर कोई इसे ‘अपणायत’ (अपनापन) की तरह देखता है। मैं भी ऐसा काम करूं कि सब मुझे अपनाएं। होस्ट ने एक सिंबल चुनने को कहा तो मैडम ने तुरंत जवाब दिया- बाजरे का सिट्‌टा। 2. कार्यकर्ता ने खोल दी पोल कई बार कार्यकर्ता के सामने नेताजी भावना में बह जाते हैं। वह सब कह जाते हैं जो नहीं कहना चाहिए। हाल ही में फलोदी में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अफसरों को धमकी दे दी। बोले- नौकरी और जिंदगी खराब कर दूंगा। और लिखकर नहीं करूंगा। फोन पर ही काम हो जाएगा। फलोदी के कार्यकर्ताओं में इसके बाद उत्साह है। विपक्ष हल्ला करे तो करे। नेताजी ने जोश भर दिया। अब कार्यकर्ता कोशिश करेंगे कि नेताजी के कहे अनुसार 20 साल तक वे उन्हें याद रखें। लेकिन सीकर में एक कार्यकर्ता ने गजब कर दिया। मंत्री झाबर सिंह खर्रा राजपुरा गांव जा रहे थे। वहां एक धार्मिक कार्यक्रम था। रास्ते में बलारा गांव पड़ा। वहां कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया। इस बीच ज्ञापन-सा लेकर एक कार्यकर्ता कार के पास आया। सीनियर कार्यकर्ता ने मंत्रीजी को उसका परिचय दिया- साहब इसका एक ट्रांसफर का मामला है। अपने घर का ही ट्रांसफर है। बीजेपी का मूल कार्यकर्ता है। युवा कार्यकर्ता का जोश बढ़ा। मंत्रीजी से बोला- साहब मैंने दो बार रामप्रसाद जी को ज्ञापन दे दिया। रुपया पैसा भी दे दिया। सब कर दिया, फिर भी काम नहीं हो रहा। मंत्रीजी ने ज्ञापन लिया। नमस्कार किया और धार्मिक कार्यक्रम की ओर बढ़ गए। इस घटना को किसी ने मोबाइल में कैद कर लिया। अब सोशल मीडिया पर मामला घूम रहा है। लोग कमेंट कर रहे हैं- कार्यकर्ता ने पोल खोल दी। 3. अब गड्‌ढे में JEN और ठेकेदार सड़क पर बारिश का पानी भरा देख स्कूटी सवार युवक ने अंदाजा लगा लिया कि पानी के नीचे सड़क ही होगी। यह नगर निगम पर जनता का अंधा विश्वास है। युवक इसी विश्वास का शिकार हो गया और स्कूटी समेत गड्‌ढे के हवाले हो गया। किसी मकान की दीवार से एक सीसीटीवी गड्ढे को झांक रहा था। उसने देखा कि स्कूटी समेत युवक गोलगप्पे की तरह गड्‌ढे के मुंह में चला गया। सीसीटीवी से निकलकर वीडियो सही ठिकाने पर जा पहुंचा। गड्‌ढा एक मेनहोल था, जिसके रिपेयरिंग का काम चल रहा था। रिपेयर के बाद न तो उसे ढंका गया और न ही लोगों को चेताने के लिए कोई बोर्ड या बैरिकेड लगाया गया। जिम्मेदारों ने सोचा होगा कि कोई गिरेगा तो खुद-ब-खुद जान जाएगा कि नीचे गड्‌ढा है। खैर, अब इसी गड्‌ढे में संबंधित ठेकेदार और जेईएन भी फंसे पड़े हैं। कलेक्टर के आदेश पर जेईएन को सस्पेंड कर दिया गया है और ठेकेदार के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दे दी गई है। 4. चलते-चलते... खंभे पर से डायरेक्ट कनेक्शन खींचकर खनिज भवन को बिलजी दी जा रही है। सोशल मीडिया पर दावा किया गया। कहा गया कि बिना मीटर बिजली दी जा रही है। हालांकि सच यह है कि खंभे से पांच-सात कदम की दूरी पर खनिज भवन के गेट के पास ही मीटर लगा हुआ है। दावा आधा झूठा है। लेकिन भाई के अर्द्धसत्य में भी वजन तो है। युवक कहता है- ये देखिए। खंभे पर कील ठोककर सीधा कनेक्शन दे दिया। अजमेर विद्युत वितरण निगम के एसई बार-बार आदेश जारी करते हैं। खामी मिलने पर घरेलू और खेती का कनेक्शन कटवा देते हैं। फिर खनिज भवन पर मेहरबानी क्यों? अगर कोई किसान या आम आदमी घर के बाहर मीटर न लगाए तो पैनल्टी लगा दी जाती है। कर्मचारी गले पड़ जाते हैं। खनिज विभाग को कोई आम आदमी पत्थर भरी ट्रॉली ले जाता मिल जाए तो पैनल्टी ठोकते ही हैं। फिर इनको क्यों गलत नियम से बिजली दी जा रही है। सारे नियम गरीब और आम आदमी के लिए ही हैं। अमीरों और सरकारी इमारतों के लिए ये नियम क्यों नहीं हैं? युवक की बात में दम है। नए मीटर खंभों पर ही लग रहे हैं। पुराने मीटर दीवारों पर लगे हैं। मीटर भवन के अंदर लगा हुआ है। हालांकि बिजली के मीटर पोल पर सबसे ज्यादा उन एरिया में लगाए जाते हैं, जहां बिजली चोरी के मामले ज्यादा हों। भवन का मीटर प्री-पेड है। अगर नियम की अनदेखी है तो लगाइए खुद पर पैनल्टी। इनपुट सहयोग- हनुमान तंवर (नागौर), (टोंक), अरविंद सिंह (जोधपुर), नरेश शर्मा (लक्ष्मणगढ़, सीकर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी..
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