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    राजस्थान में पेट्रोल-डीजल का कितना स्टॉक?:क्यों पंप पर लगी लाइनें और लड़ने लगे लोग; एक्सपर्ट से जानें- क्या है अफवाह और वास्तविक स्थिति

    1 day ago

    अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण LPG को लेकर लोगों मन में आशंकाएं बैठीं, लेकिन अब पेट्रोल-डीजल को लेकर भी अफवाहें फैल रही हैं। केंद्र की ओर से दो दिन पहले इंडस्ट्रियल डीजल 22 रुपए प्रतिलीटर बढ़ा दिया गया। इस कारण एक दिन पहले गुजरात के सूरत, राजकोट सहित कुछ शहरों में थोड़ी परेशानी देखी गई। हालांकि, फिर स्थिति सामान्य हो गई। इस बीच सोमवार (23 मार्च) को राजस्थान में पेट्रोल खत्म होने की अफवाह से बीकानेर, उदयपुर, जालोर, आबूरोड और सलूम्बर समेत कई जिलों में पम्पों पर गाड़ियों की लाइनें लग गईं। कई जगह विवाद होने से पुलिस को बुलाना पड़ा। वहीं, केंद्र और राज्य सरकार लगातार आवश्वस्त कर रही हैं कि सब कुछ सामान्य है। राजस्थान में फिलहाल क्या हालात हैं? कितना स्टॉक है? सरकार ने स्थितियां सामान्य बनाए रखने के लिए क्या उपाय किए हैं? युद्ध लम्बा चलता है तो क्या कुछ चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा हो सकती है? इन सब मुद्दों पर भास्कर ने पेट्रोलियम कम्पनियों और डीलर्स से बात… भास्कर : राजस्थान के आधा दर्जन जिलों में पेट्रोल-डीजल खत्म होने की अफवाह, ऐसा डर का माहौल क्यों? एक्सपर्ट : राजस्थान में कहीं भी पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और न ही आने वाले कुछ दिनों में संकट जैसी कोई परेशानी नोटिस की जा रही है। राजस्थान में महज अफवाह है। गुजरात की पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने भी कहा है कि उनके यहां भी स्थितियां सामान्य हैं। केंद्र ने दो दिन पहले इंडस्ट्रियल डीजल के रेट 22 रुपए प्रतिलीटर बढ़ाए थे। इस कारण गुजरात के इंडस्ट्रियल एरिया और उससे जुड़े लोग बल्क में डीजल उठाने का प्रयास कर रहे थे। इससे कुछ दिक्कतें आईं, लेकिन सब मैनेज हो गया है। अब वहां ऐसी कोई परेशानी नहीं है। राजस्थान में लोगों को अफवाह से बचना होगा और तथ्यों की ओर ज्यादा ध्यान देना होगा। फिलहाल बाईक्स, कारों और ट्रांस्पोर्ट वाहनों के लिए किसी तरह का कोई संकट नहीं है। भास्कर : इंडस्ट्रियल डीजल महंगा हो गया है, तो क्या इंडस्ट्रीज से जुड़े लोग पेट्रोल पंप से बल्क में डीजल ले सकते हैं? एक्सपर्ट : ऐसा नहीं है। सस्ता डीजल लेने के लालच में जरूर इंडस्ट्रीज वाले ऐसा प्रयास कर सकते हैं, लेकिन सरकार ने ऐसा रोकने के लिए एक उपाय भी किया। कंपनियों के माध्यम से सभी पेट्रोल पंप मालिकों को निर्देश दिलवा दिया गया है कि वे ड्रम्स या छोटे-बड़े कंटेनर आदि में बल्क डीजल या पेट्रोल नहीं दें। उन्हें सख्ती से कहा है कि पेट्रोल पंप केवल गाड़ियों में ही डीजल या पेट्रोल भरेंगे। ऐसा राजस्थान में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में हुआ है। इससे लोगों में आशंकाओं के चलते स्टॉक करने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी। भास्कर : युद्ध के दौरान व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए और भी कदम उठाए हैं क्या? एक्सपर्ट : युद्ध के चलते व्यवस्थाएं लम्बे समय तक ठीक बनी रहें, इसके लिए दूसरा उपाय कम्पनियों के जरिए यह भी किया है कि डीलर्स को उधार डीजल या पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। कैश देने पर ही कम्पनियां डीलर्स को पेट्रोल-डीजल दे रही हैं। जो डीलर जितनी क्षमता में डीजल या पेट्रोल लेंगे, उसकी तत्काल राशि चुकाएंगे। डीलर्स भी यदि अतिरिक्त स्टॉक करेगा तो भुगतान करना होगा। इससे कैश फ्लो भी ठीक रहेगा। भास्कर : इन बदलावों से आम आदमी पर कोई असर पड़ेगा? एक्सपर्ट : कंपनी के इन उपायों से जनता को किसी तरह का कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। बाइक या गाड़ियों में तेल भरवाने वाले रीटेल ग्राहकों को मांग के अनुसार पूरा तेल मिल रहा है। कम्पनियों के दोनों उपायों से जनता को कोई तकलीफ नहीं है। पेट्रोल-डीजल की कोई कमी होती नजर नहीं आ रही है। केंद्र और राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रशासन बार-बार अपील भी कर रहा है कि फिलहाल पर्याप्त स्टॉक है। भास्कर : क्या ये उपाय किल्लत रोकने के लिए पर्याप्त हैं? एक्सपर्ट : फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है। ऐसे में इंडस्ट्रियल डीजल के रेट बढ़ाना, प्रीमियम पेट्रोल की भी रेट 2.35 रुपए प्रतिलीटर रेट बढ़ाना और डीलर्स पर सख्ती रखने जैसे उपाय ठीक ही कहे जा सकते हैं। गाड़ियों में डलने वाले सामान्य पेट्रोल-डीजल पर कोई रेट नहीं बढ़ाया गया है। ऐसे में आम आदमी को परेशानी नहीं है। प्रीमियम पेट्रोल खरीदने वालों की संख्या 10 फीसदी के आस-पास रहती है। इससे आम जन पर खास फर्क नहीं पड़ेगा। भास्कर : देश की तुलना में राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की कितनी खपत होती है? एक्सपर्ट : देश से तुलना करें तो महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे राज्यों में डीजल-पेट्रोल की मांग काफी अधिक है। सबसे अधिक खपत वाले राज्यों में राजस्थान टॉप 10 में शामिल है। देश की तुलना में राजस्थान में खपत करीब 6 प्रतिशत के आस-पास मानी जा सकती है। राज्य में कृषि, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों के कारण डीजल की मांग पेट्रोल की तुलना में काफी अधिक है। भास्कर : राजस्थान में कितने दिनों का स्टॉक सुरक्षित है? एक्सपर्ट : राजस्थान की बात करें तो कंपनियों के पास पेट्रोल-डीजल का 30-35 दिन तक का स्टॉक रहता है। ये भंडार पेट्रोलियम कंपनियों और डिपो में होता है। इसमें पेट्रोल पंपों का स्टॉक शामिल नहीं है। अभी युद्ध के दौरान भी भारत में आने वाली सप्लाई थमी नहीं है। लगातार ईरान की तरफ से जहाज तेल-गैस ला रहे हैं। उन्हें निकालने की व्यवस्था सरकार कर रही है। यदि युद्ध लम्बा चलता है तो भी पर्याप्त स्टॉक की स्थिति बनी रहेगी। भास्कर : 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, उसका क्या? एक्सपर्ट : युद्ध के कारण समुद्री रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर चिंता है, लेकिन भारत की सालों पहले जैसी स्थितियां अब नहीं हैं। अब भारत का केवल 40% कच्चा तेल इस रास्ते से आता है। बाकी 60% तेल रूस, पश्चिमी अफ्रीका, अमेरिका और मध्य एशिया जैसे वैकल्पिक रास्तों से आता है। सरकार ने साफ किया है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा अब किसी एक रूट या देश पर निर्भर नहीं है। एक दशक पहले भारत केवल 27 देशों से तेल खरीदता था, जो अब बढ़कर 40 हो गए हैं। …. पेट्रोल-डीजल खत्म होने की अफवाह से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… पेट्रोल खत्म होने की अफवाह, पंप पर लगी भीड़:गाड़ियों के साथ लोग कैन और कैंपर लेकर पहुंचे, पहले तेल लेने के लिए झगड़ने लगे राजस्थान में पेट्रोल पंप बंद होने की अफवाह के बाद बीकानेर, उदयपुर, जालोर, आबूरोड और सलूम्बर समेत अन्य जिलों में सोमवार देर रात पंप पर गाड़ियों की कतार लग गई। पूरी खबर पढ़िए…
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