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    ट्रम्प बोले- गोल्डन डोम प्रोजेक्ट के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत:कुछ न कुछ हल निकालेंगे; ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री बोली- अमेरिका का गुलाम नहीं बनना

    2 days ago

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को फिर से ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की अपनी इच्छा दोहराई है। उन्होंने कहा कि कुछ न कुछ हल निकल आएगा। ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम नामक बड़े रक्षा प्रोजेक्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण बताया है। गोल्डन डोम अमेरिका का मिसाइल रक्षा प्रोजेक्ट है। यह प्रोजेक्ट इजराइल के आयरन डोम से प्रेरित है। गोल्डन डोम का मकसद चीन, रूस जैसे देशों से आने वाले खतरे से अमेरिका को बचाना है। ट्रम्प का यह बयान व्हाइट हाउस में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के बीच हुई हाई कमेटी बैठक के बाद आया है। इस बैठक में कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ। बैठक के बाद ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ड ने कहा कि उन्हें अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने की उम्मीद है। लेकिन ग्रीनलैंड पर अमेरिका का राज स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, “अमेरिका के साथ अपने सहयोग को मजबूत करना हमारे लिए ठीक है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अमेरिका के गुलाम होना चाहते हैं।” ट्रम्प बोले- NATO को हमारी मदद करनी चाहिए उन्होंने आगे कहा कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड नहीं लिया, तो रूस या चीन इसे ले लेंगे और वे ऐसा कभी नहीं होने देंगे। ट्रम्प का कहना है कि NATO को इस मामले में आगे आना चाहिए और अमेरिका को ग्रीनलैंड दिलाने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका के हाथ में होने से NATO और ज्यादा मजबूत और प्रभावी हो जाएगा। ग्रीनलैंड पर चर्चा के लिए वर्किंग ग्रुप बनेगा व्हाइट हाउस में बुधवार को हुई बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन और ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ट शामिल हुईं। इस बैठक में कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है। हालांकि, बैठक के बाद तीनों पक्षों ने ग्रीनलैंड से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई, जिसकी बैठकें आने वाले हफ्तों में होंगी। रासमुसेन ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ असहमति बनी हुई है। हमारा रुख काफी अलग है। उन्होंने ट्रम्प के ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जा करने के विचार को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा, ‘हमने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि यह डेनमार्क के हित में नहीं है।’ उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश आर्कटिक में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार हैं, जिसमें ग्रीनलैंड में और ज्यादा अमेरिकी सैन्य अड्डे बनाने की संभावना भी शामिल है। स्वीडन ने ग्रीनलैंड में सैन्यकर्मी भेजे, फ्रांस और जर्मनी भी टीम भेजेंगे स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने बुधवार को कहा कि डेनमार्क के कहने पर स्वीडिश आर्म्ड फोर्स के कई अधिकारियों को एक सैन्य अभ्यास में शामिल होने के लिए ग्रीनलैंड भेजा गया है। इसके अलावा फ्रांस और जर्मनी दोनों ने कहा है कि वे ग्रीनलैंड में सैन्यकर्मी भेजेंगे। यूरोपीय देशों ने भी सुरक्षा सहयोग की पेशकश की है। जर्मन विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने में डेनमार्क का समर्थन करने के लिए 13 लोगों की एक टीम भेजेगा। नॉर्वे के रक्षा मंत्री टोरे सैंडविक ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि नॉर्डिक देश आर्कटिक में NATO सदस्यों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए ग्रीनलैंड में दो सैन्यकर्मियों को भेजेगा। ग्रीनलैंड की अपनी सेना नहीं, अमेरिका और डेनमार्क के सैनिक तैनात ग्रीनलैंड की अपनी कोई सेना नहीं है। उसकी रक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी डेनमार्क की है। यह डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है। यहां का अबादी महज 57 हजार है। 2009 के बाद, ग्रीनलैंड सरकार को तटीय सुरक्षा और कुछ विदेशी मामलों में छूट मिली है, लेकिन रक्षा और विदेश नीति के मुख्य मामले अभी भी डेनमार्क के पास हैं। अमेरिकी सैनिक: अमेरिका का पिटुफिक स्पेस बेस (थुले एयर बेस)। ग्रीनलैंड के उत्तर-पश्चिम में स्थित यह बेस अमेरिका चलाता है। यह बेस मिसाइल चेतावनी सिस्टम और स्पेस मॉनिटरिंग के लिए इस्तेमाल होता है। NYT के मुताबिक यहां करीब 150 से 200 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ये मिसाइल चेतावनी, स्पेस निगरानी और आर्कटिक सुरक्षा के लिए हैं। यह अमेरिका का सबसे उत्तरी सैन्य अड्डा है। डेनिश सैनिक: डेनमार्क की जॉइंट आर्कटिक कमांड ग्रीनलैंड में काम करती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यहां कुल करीब 150 से 200 डेनिश सैन्य और सिविलियन कर्मी हैं। जो निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू, और संप्रभुता की रक्षा करते हैं। इसमें प्रसिद्ध सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल (एक छोटी एलीट यूनिट, करीब 12-14 लोग) भी शामिल है, जो कुत्तों की स्लेज से लंबी गश्त करती है। फोटो के जरिए ग्रीनलैंड को अमेरिका ने चेतावनी दी डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को बढ़ावा दिया गया। तस्वीर में सड़क पर ग्रीनलैंड का झंडा लगे दो स्लेज दिखाई दे रही हैं। एक रास्ता व्हाइट हाउस और अमेरिकी झंडे की ओर जाता है, जबकि दूसरा रास्ता अंधेरे और बिजली की ओर जाता है। जहां चीन और रूस का झंडा लगा है। तस्वीर के साथ कैप्शन लिखा है, "ग्रीनलैंड किस तरफ जाओगे?" तस्वीर के जरिए ट्रम्प ग्रीनलैंड पर दबाव बनाना चाहते हैं कि अगर चीन-रूस की तरह गए तो अंजाम बुरा हो सकता है। जबकि अमेरिका की तरफ आने से शांति रहेगी। डेनमार्क बोला- चीन और रूस से फिलहाल कोई खतरा नहीं डेनमार्क ने ट्रम्प के चीन और रूस से खतरा होने के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने कहा है कि वे ट्रम्प से सहमत हैं कि आर्कटिक में सुरक्षा स्थिति बदल रही है। ट्रम्प के रूसी और चीनी जहाजों के नियमित रूप से ग्रीनलैंड के चारों ओर चक्कर लगाने के दावे को गलत बताते हुए रासमुसेन ने कहा, "हमारी खुफिया जानकारी के अनुसार, पिछले एक दशक से ग्रीनलैंड में कोई चीनी युद्धपोत नहीं आया है।" उन्होंने कहा कि "चीन और रूस से तत्काल कोई खतरा नहीं है"। डेनमार्क-ग्रीनलैंड आर्कटिक में सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने कहा है कि उन्होंने आर्कटिक रक्षा को मजबूत करने के अपने वादे के तहत सहयोगियों के साथ से ग्रीनलैंड और उसके आसपास अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाना शुरू कर दिया है। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “आज से, NATO के सहयोग से ग्रीनलैंड और उसके आसपास के क्षेत्रों में सैन्य उपस्थिति का विस्तार किया जाएगा।” ग्रीनलैंड बोला- अमेरिका नहीं डेनमार्क को चुनेंगे ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने कहा है कि अगर ग्रीनलैंड को अमेरिका और डेनमार्क में से किसी एक को चुनना पड़े, तो वह डेनमार्क को चुनेगा। उन्होंने यह बयान ऐसे वक्त पर दिया जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं। नीलसन ने 13 जनवरी को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। उनका बयान अमेरिका की संसद में ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने से जुड़े बिल के पेश होने के बाद पहला आधिकारिक बयान है। नीलसन के बयान पर ट्रम्प ने कहा कि मैं उन्हें नहीं जानता और इस बात पर उनसे सहमत नहीं हूं।। ये प्रधानमंत्री के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। अमेरिकी संसद में 12 जनवरी को ‘ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट’ नाम का बिल पेश किया गया था। इसका मकसद ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करना और बाद में उसे अमेरिका का राज्य बनाना है। अगर यह बिल पास होता है, तो ग्रीनलैंड अमेरिका का 51वां राज्य बन सकता है। क्या है ट्रम्प का गोल्डन डोम प्रोजेक्ट अमेरिका ने इजराइल के आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तर्ज पर अपना डिफेंस सिस्टम गोल्डन डोम बनाने का फैसला किया है। ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के एक हफ्ते बाद ही गोल्डन डोम प्रोजेक्ट का ऐलान किया था। यह प्रोजेक्ट करीब 175 अरब डॉलर (लगभग 14-15 लाख करोड़ रुपये) का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गोल्डन मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए 1200 से ज्यादा सैटेलाइट्स लॉन्च करने की योजना बनाई गई है। इसकी मदद से अमेरिका दुश्मन मिसाइलों का अंतरिक्ष में ही पता लगाकर उन्हें नष्ट करने की तैयारी कर रहा है। इनमें 400 से 1000 सैटेलाइट्स दुश्मन मिसाइलों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए तैनात किए जाएंगे। वहीं, लगभग 200 इंटरसेप्टर सैटेलाइट्स उन मिसाइलों को अंतरिक्ष में ही मार गिराने के लिए तैयार की जाएंगी। यह डिफेंस सिस्टम दुनिया के किसी भी हिस्से से लॉन्च होने वाली मिसाइलों को रोकने में सक्षम होगा। ट्रम्प ने दावा किया है कि गोल्डन डोम अंतरिक्ष से हुए हमलों को भी रोकने के काबिल होगा। इसमें सर्विलांस सैटेलाइट और इंटरसेप्टर सैटेलाइट दोनों शामिल होंगे। ट्रम्प ने जनवरी में इस प्रोजेक्ट को शुरू किया था। उन्होंने कहा है कि यह सिस्टम 2029 तक काम करने लगेगा। प्रोजेक्ट की कमान अमेरिकी स्पेस फोर्स के वरिष्ठ जनरल माइकल ग्यूटलेन को सौंपी गई है। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में ग्रीनलैंड पर कब्जे का बिल पेश: 51वां राज्य बनाने का अधिकार मिलेगा, 300 सालों से यह डेनमार्क का हिस्सा अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन ने सोमवार को ‘ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट’ नाम से एक बिल पेश किया है। इस बिल का मकसद अमेरिकी सरकार को ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने और बाद में इसे अमेरिका का राज्य बनाने के लिए कानूनी अधिकार देना है। पूरी खबर पढे़ं…
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